भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना

स्वदेशी टेक्नोलॉजीज का विकास

अंतिम मील तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना

राष्ट्रीय डिजिटल फ्रंटियर सुरक्षित करना

भारत को भविष्य से जोड़ना

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सी-डॉट का मानना ​​है कि नवाचार और प्रतिबद्धता के साथ, कोई सड़क बहुत लंबा नहीं है, कोई समुद्र बहुत मोटा नहीं है और कोई पुल बहुत दूर नहीं है। यह दर्शन है, जिसने सी-डीओटी को अपने क्षेत्र में अग्रणी बनने का नेतृत्व किया है।

दृष्टि

  • सी-डॉट एक विश्व स्तरीय दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास केन्द्र बने ।

मिशन

  • अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां, उत्पाद और समाधान डिजाइन और विकसित करना।
  • भारत की, विशेषकर सामरिक और ग्रामीण क्षेत्रों में राष्ट्रीय महत्व की, दूरसंचार आवश्यकताओं को पूरा करना।

लक्ष्य

  • दूरसंचार प्रौद्योगिकी उत्पादों और सेवाओं पर काम करना।
  • दूरसंचार तथा कन्वर्ज्ड नेटवर्कों की मौजूदा और भावी आवश्यकताओं, विशेषकर ग्रामीण अनुप्रयोग, रणनीतिक क्षेत्र और सुरक्षा एजेंसियों इत्यादि से संबंघित राष्ट्रीय महत्व की आवश्यकताओं के लिए समाघान उपलब्घ कराना।
  • अनुसंधान तथा विकास कार्यकलापों को बाज़ारोन्मुख बनाना और सी-डॉट को उत्कृष्ट केंद्र के रूप में प्रतिष्ठापित करना।
  • दूरसंचार कंपनियों तथा सेवा प्रदाताओं को संस्थापित नेटवर्कों, पाइलट प्रयोगों और अघ्ययनों के अधिकतम उपयोग के माध्यम से नई प्रौद्योगिकियाँ, विशिष्टताएं और सेवाएं शुरू करने में सहयोग करना।
  • लागत प्रभावी समाधान उपलब्घ कराने के लिए शिक्षाविदों, उद्योग जगत, समाघान प्रदाताओं, दूरसंचार कंपनियों और अन्य अनुसन्धान तथा विकास संगठनों के साथ भागीदारी एवं संयुक्त गठबंघन करना।
  • सी-डॉट द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के माध्यम से भारतीय दूरसंचार विनिर्माण आधार को सुदृढ़ करना।

कार्यकारी निदेशक की कलम से

Beginning the journey with digital switching systems, C-DOT has transversed the complex Telecom landscape, developing products in the area of optical, satellite and wireless communication from circuit switching technology of yester years, C-DOT has proven its expertise in ATM and Next Generation Networks. From a purely hardware development Centre it has diversified into development of Telecom software solutions like IN, NMS, Data Clearing House etc. and has journeyed from a protected environment of closed market to an open and competitive market. C-DOT has evolved, from a single mission oriented organization to an R&D centre, working on several important, cutting edge technologies. And, with the support it has been receiving from the Government, especially in Projects of National Importance, the Centre will strive to maintain its National relevance. Nearly 50% of present fixed line infrastructure, after allowing MNCs entry into the Telecom Market is from C-DOT technology and that in itself is a testimony to the Centre achieving its objectives fully. That C-DOT engineers have been striving to add value through regular up gradation to the fixed line infrastructure is a tribute to the commitment of C-DOTians to the original cause.

यात्रा

1984
1985
1986
1987
1988
1989
1990
1991
1992
1993
1994
1995
1997
1998
1999
2000
2001
2002
2003
2004
2005
2006
2007
2008
2009
2010
2011
2012
2013
2014
2015
2016
1984

संकल्पना/स्थापना: भारत सरकार ने 36 महीने में 36 करोड़ के बजट से डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक स्विचिंग सिस्टम (टेलीफोन एक्सचेंज) विकसित करने के लिए कुछ चुनिन्दा लोगों को शामिल करते हुए 25 अगस्त 1984 में वैज्ञानिक सोसाइटी के रूप में सी-डॉट की स्थापना की। इस प्रकार भारत में एक महान आन्दोलन का सूत्रपात "36 महीने -36 करोड़" के आदर्श वाक्य से हुआ ।

1985

• जनवरी 1985: डी.एस.एस. (डिजिटल स्विचिंग सिस्टम) के लिए सामान्य तकनीकी विनिर्देशन को अंतिम रूप दिया गया। • फरवरी 1985: बोर्ड को पूरी तरह से आकार दिया गया: जी.बी मीमांसी, एम.वी पिटके, डी.आर.महाजन, एस.जी पित्रोदा (सलाहकार) • मुख्य विकास के उप-उत्पाद के रूप में, सी-डॉट ने स्थापना के पांच महीने के भीतर पूरी तरह से डिजिटल पी.सी.एम. इलेक्ट्रॉनिक पीएबीएक्स ए-128 पोर्ट विकसित किया। • अगस्त 1985: 128 पोर्ट पीएबीएक्स का बंगलुरु में प्रदर्शन: प्रति लाइन लागत में जबरदस्त रुप से कमी।

1986

• मार्च 1986: 128 पोर्ट पीएबीएक्स प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के लिए 48 विनिर्माताओं साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये गए। • जून 1986: मैक्स प्रोटोटाइप पर लाइन टू लाइन कॉल । • जुलाई1986: किट्टूर में पहला 128पी रैक्स का उद्घाटन । देश का पहला स्वदेशी विकसित 128 लाइनों की क्षमता वाला डिजिटल ग्रामीण इलेक्ट्रॉनिक एक्सचेंज (रैक्स) कर्नाटक के किट्टूर में 22 जुलाई 1986 को स्थापित किया गया । • दिसंबर 1986: सी-डॉट स्विच के लिए मॉडल उत्पादन संयंत्र की स्थापना के लिए आईटीआई के साथ समझौता किया गया।

1987

• जनवरी-फरवरी 1987: 128 रैक्स के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए 8 विनिर्माताओं के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। • मई 1987: विस्तृत परीक्षण और नेटवर्क सत्यापन के लिए दिल्ली छावनी एक्सचेंज में 512 पी मैक्स की स्थापना । • अगस्त 1987: उलसुर में मल्टीमॉडल मैक्स के माध्यम से पहला कॉल । • अगस्त 1987: 36 महीने पूर्ण होने पर सी-डॉट कीर्तिगान। • अक्टूबर 1987: विज्ञान भवन में प्रधान मंत्री श्री राजीव गांधी द्वारा राष्ट्र को रिपोर्ट समर्पित।

1988

• सी-डॉट ने 1987 में 4000 लाइनों के एक मेन आटोमेटिक एक्सचेंज (मैक्स-I) का विकास पूरा किया और जनवरी 1988 में भारत का स्वदेशी 4000 लाइन वाला एक्सचेंज दिल्ली छावनी में परिचालित हो गया । • प्रतिदिन एक 128 पोर्ट सी-डॉट रैक्स स्थापित करने के लिए 1 अप्रैल 1988 को रैक्स-ए-डे कार्यक्रम की घोषणा की गई । यह 1993 में 25 रैक्स प्रतिदिन के पैमाने तक पहुंच गया और इसका लगातार आगे बढ़ना जारी रहा।

1989

• अगस्त 1989: उलसुर में वाणिज्यिक सेवा के लिए मैक्स-एल कट-ओवर । • सितंबर 1989: सी-डॉट टीआरसी का विलय।

1990

• जनवरी 1990: सी-डॉट के कामकाज और प्रगति की संसदीय समिति द्वारा समीक्षा । • मार्च 1990: संसदीय समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत । • जून 1990: एकल चैनल वीएचएफ, 2/15 साझा रेडियो सिस्टम, 4 आरयू -10, 6-आरयू 10, और डीमैक्स -34 के लिए प्रौद्योगिकी - हस्तांतरण की घोषणा । • अक्टूबर 1990: नए बोर्ड ने कार्यभार संभाला: बी.डी. प्रधान, के.बी. लाल, के.एन. गुप्ता, एस.जी. वागले।

1991

• मार्च 1991: उलसुर में मैक्स-एल 4800 लाइनों तक विस्तारित। प्रति वर्ष राजस्व के रूप में 7.5 करोड़ रुपये की आय। • जुलाई 1991: मैक्स-एल उलसुर में 10 हज़ार लाइनों की स्थापना शुरू हुई। • नवंबर 1991: वियतनाम के साथ $ 65,000 अमरीकी डॉलर के सी-डॉट के पहले निर्यात आदेश पर हस्ताक्षर। इसमें 57 128 पी.रैक्स की बिक्री शामिल थी। • दिसंबर 1991: 256 पी रैक्स प्रणाली विस्तारित प्रयोगशाला परीक्षणों के लिए तैयार । • दिसंबर 1991: 10,000 लाइनों वाला मैक्स-एल माननीय संचार राज्यमंत्री राजेश पायलट द्वारा राष्ट्र को समर्पित ।

1992

• फरवरी 1992: उलसुर में 10,000 लाइन एक्सचेंज कट-ओवर समारोह और दिल्ली तथा बंगलुरु में पुरस्कार वितरण समारोह । • मार्च 1992: बंगलुरु दूरसंचार जिले में अनकल में पहला 256 पी.आर.एक्स. शुरू । • अप्रैल 1992: सैटेलाइट आधारित ग्रामीण टेलीग्राफ नेटवर्क (एसबीआरटीएन) का उद्घाटन । • जून 1992: सी-डॉट ने उपकरण की आपूर्ति में एक मिलियन लाइन का आंकड़ा पार किया। केरल में पट्टनमथेट्टा में पहले एसबीएम टैक्स की स्थापना । • जुलाई 1992: 256 पी रैक्स के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की घोषणा। • 128 पी बिजनेस एक्सचेंज और संबंधित टर्मिनल उपकरण का पहला क्षेत्रीय मॉडल पूरा हुआ। • दिसंबर 1992: ओएलटीई (ऑप्टिकल लाइन टर्मिनेशन उपकरण) के के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की घोषणा।

1993

• मार्च 1993: उलसुर में मैक्स- एल ने 1, 00,000 बीएचसीए की कुल संख्या को पार किया, जिससे लाइन कमीशन 52,000 तक चला गया।

1994

• भारत- जर्मन संघीय गणराज्य सहयोग के एक हिस्से के रूप में 1994 में सी-डॉट एएसआईसी डिजाइन सेंटर की स्थापना । • 1994-2001 के दौरान सी-डॉट में केंद्र ने एएसआईसी (एप्लीकेशन स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड सर्किट्स), एफपीजीए और प्रोग्राममेबल लॉजिक डिवाइसेज के फ्रंट एंड डिजाइन के लिए बुनियादी ढांचा प्रदान किया ।

1995

• दिसंबर,1995 में बंगलुरु में इंदिरानगर में 30000 लाइन मैक्स-एक्सएल का वाणिज्यिक परीक्षण शुरू ।

1997

• 1997 में तत्कालीन प्रधान मंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने 30000 लाइन का मैक्स-एक्सएल एक्सचेंज राष्ट्र को समर्पित किया । • 15 अगस्त, 1997 को, सी-डॉट एक्सचेंजों में निशुल्क-फोन सेवा के उद्घाटन के साथ सी-डॉट द्वारा देश की पहली आई.एन. (इंटेलिजेंट नेटवर्क) सेवा का दिल्ली में परीक्षण शुरू । (1600 टोल फ्री) • भारत की आजादी के स्वर्ण जयंती दिवस पर सी-डॉट एक्सचेंज की आईएसडीएन सेवा क्षमताओं का दूरसंचार आयोग के सदस्यों के समक्ष प्रदर्शन।

1998

• आईएसडीएन सेवाओं के साथ 40000 लाइनों का समर्थन करने और व्यस्त घंटों के दौरान 8 लाख के मेट्रो क्षेत्रों में उच्च कॉलिंग दरों के लिए सेवाएँ देने हेतु अत्याधुनिक MAX-XL के विकास की महत्वपूर्ण उपलब्धि का 27 दिसंबर,1998 को बंगलुरु के येलहंका में वाणिज्यिक सेवा के लिए उद्घाटन । • दक्षिण अफ़्रीका के दूरसंचार मंत्री और प्रतिनिधिमंडल का दौरा ।

1999

• संचार मंत्री श्री जगमोहन का सी-डॉट बंगलुरु का दौरा।

2000

• 1 जनवरी, 2000 को 166 मैक्स एक्स एल की समूचे देश में कुल 1 लाख ग्राहक लाइनों को सेवा प्रदान कर रहे थे।

2001

• आईवीआरएस (इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पांस सिस्टम) का प्रौद्योगिकी हस्तान्तरण । • मेसर्स भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को एटीएम प्रौद्योगिकी का प्रौद्योगिकी हस्तान्तरण । • मुख्य आर एंड डी भवन के लिए सुपर-स्ट्रक्चर का लगभग 50% काम पूरा । • सी-डॉट ने मिस्र और भूटान के लिए मैक्स का देश के अनुकूल विकास । • सी-डॉट प्रौद्योगिकी जनवरी 2001 में 9 देशों में लगाई गई और 15 देशों में क्षेत्रीय परीक्षण । • जनवरी 2001 भुज: आपदा प्रबंधन के लिए सी-डॉट एक्सचेंज की स्थापना ।

2002

• एटीएम टेक्नोलॉजी के लिए सी-डॉट को पहला अमरीकी पेटेंट मिला । • सी-डॉट एनएमएस बीएसएनएल नेटवर्क में लगाया गया। • वर्ष 2002-03 के अंत तक भारतीय दूरसंचार नेटवर्क में कुल लगभग 45,000 सी-डॉट एक्सचेंज लगाए गए। • इंटेलिजेंट नेटवर्क के सर्विस कण्ट्रोल पॉइंट (एससीपी) और सर्विस स्विचिंग पॉइंट क्रमशः 6 और 233 शहरों में संस्थापित किये गए ।

2003

• अफगानिस्तान के संचार मंत्री के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 27 मार्च, 2003 को सी-डॉट का दौरा किया । • ईरान टेलिकॉम रिसर्च सेंटर और तीन भारतीय विनिर्माताओं के साथ कॉम्पैक्ट एसटीएम -1 का प्रौद्योगिकी हस्तान्तरण । • 256पी रैक्स को ए एन रैक्स में रूपान्तरित करने के लिए फ़ील्ड सपोर्ट। • सी-डॉट और बीएसएनएल के बीच फील्ड सपोर्ट के लिए समझौता ज्ञापन। • सी-डॉट प्रक्रियाओं और उत्पादों की सुरक्षा के उद्देश्य से वर्ष 2003-04 के दौरान आईपीआर सेल का गठन ।

2004

• दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में किराए की इमारतों में परिचालित सभी सी-डॉट कार्यालय जून 2004 में मेहरौली में स्थित नए एकीकृत सी-डॉट आर एंड डी कैंपस में स्थानांतरित। • सी-डॉट ने 25 अगस्त 2004 को नई दिल्ली में वार्षिक टेलीकॉम संगोष्ठी 2004 का आयोजन किया। इसके केन्द्रीय विषय ब्रॉडबैंड, मोबाइल और वायरलेस टेलीकॉम समाधान थे।

2005

• अल्काटेल के साथ संयुक्त उद्यम: सितंबर 2005 में चेन्नई में सी-डॉट अल्काटेल रिसर्च सेंटर (सी-एआरसी) का उद्घाटन ।

2006

• पहली पीढ़ी के सिस्टम के रूप में संस्थापना योग्य 2.4, 3.5 और 5.7 गीगाहर्ट्ज बैंड में वाईमैक्स / मिल्टन सिस्टम हाइब्रिड विकसित करने के लिए 30 जनवरी 2006 को सीआरसी, कनाडा के साथ सहयोगी परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर। • बीएसएनएल के 40 स्थलों पर एलएनएमएस की स्थापना के लिए सी-डॉट और बीएसएनएल के बीच समझौता। बीएसएनएल नेटवर्क में एमएससी, बीएससी और बीटीएस के निष्पादन की निगरानी के लिए इस्तेमाल सी-डॉट जीएसएम नेटवर्क मैनेजमेंट सिस्टम (जीएनएमएस) के संयुक्त कार्यान्वयन और उपस्थापित करने के लिए बीएसएनएल के साथ समझौते पर हस्ताक्षर । • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सेलुलर मोबाइल सेवाओं के लिए, बुनियादी ढांचागत समर्थन की परियोजना के लिए तकनीकी परामर्श प्रदान करने हेतु सी-डॉट ने सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि प्रशासन (यूएसओएफए) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए । • सी-डॉट ने एनजीएन परीक्षण के लिए बीएसएनएल के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए । 32 चैनल डेंस तरंगदैर्ध्य डिवीजन मल्टीप्लेक्सिंग (डीडब्लूडीएम) उपकरण विकसित किए गए और जुलाई 2006 में टीईसी से प्रौद्योगिकी स्वीकृति प्राप्त की गई ।

2007

• दिल्ली क्षेत्र के लिए वैध प्रवर्तन पर्यवेक्षण कार्य प्रणाली (एल.ई.एम.एफ. प्रणाली) की आपूर्ति और स्थापना के लिए वित्त मंत्रालय, प्रवर्तन निदेशालय के साथ परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। • टीईसी, दिल्ली ने सी-डॉट द्वारा विकसित "8 चैनल सीडब्ल्यूडीएम" प्रणाली को प्रौद्योगिकी मंजूरी दे दी।

2008

• बीएसएनएल में क्षेत्रीय परिक्षण के लिए सी-डॉट विन सिस्टम स्थापित किया गया। • राजस्थान सर्किल के जोधपुर क्षेत्र में डब्लूएलएल नेटवर्क स्थापित किया गया ।

2009

• बीएसएनएल के पूर्वी तथा उत्तरी क्षेत्र और एमटीएनएल, दिल्ली तथा मुंबई के लिए जीएसएम नेशनल रोमिंग हेतु डाटा क्लीयरिंग हाउस का 1 फरवरी 2009 को वाणिज्यीकरण । • माननीय राज्यमंत्री श्री गुरुदास कामथ का सी-डॉट परिसर, नई दिल्ली में आगमन ।

2010

• दिसंबर 2010: अजमेर में जीपॉन जीपॉन का उद्घाटन

2011

• सी-डॉट की जीपॉन प्रौद्योगिकी का सार्वजनिक क्षेत्र के (मैसर्स बीईएल, आईटीआई और यूटीएल) और निजी कंपनियों (मैसर्स एस.एम. क्रिएटिव, वी.एम.सी. सिस्टम लिमिटेड, साई इन्फोसिस्टम्स लिमिटेड और एच.एफ.सी.एल.) 7 विनिर्माताओं को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण किया गया। • विभिन्न प्रौद्योगिकी परियोजनाओं, अर्थात् एल.टी.ई.-ए., ब्रॉडबैंड वायरलेस, एन.एम.एस., डी.एस.एल.ए.एम., ए.डी.एस.एल. सी.पी.ई., टी.डी.एम. को एन.जी.एन. में अंतरित करने और पीसीबी के विनिर्माण के संबंध में संविदात्मक संबंधों के लिए एनडीए (गैर प्रकटीकरण समझौते) पर हस्ताक्षर किए गए।

2012

• सी-डॉट जीपॉन प्रौद्योगिकी की पायलट परियोजनाएं एनओएफएन में शामिल। • आईसीटी के माध्‍यम से राष्‍ट्रीय शिक्षा मिशन (एन.एम.ई.आई.सी.टी.) की शिक्षण सामग्री का वितरण दूरस्थ और कैंपस के बाहर के शिक्षार्थियों को वाईफाई के माध्यम से करने के लिए वास्तविक परिदृश्य में उपयोग कर इंदिरा गाँधी राष्ट्रिय मुक्त विश्वविद्यालय में बी.बी.डब्ल्यू.टी. का पी.ओ.सी. परीक्षण किया गया ।

2013

• एनओएफएन के अंतर्गत समूचे भारत में जीपॉन लगाने के लिए एनएमएस के विकास हेतु बीबीएनएल के साथ परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया शुरू । • मऊ, इंदौर में मिलिट्री कॉलेज ऑफ़ टेलिकॉम इंजिनियर्स(एमसीटीई) में जीपॉन प्रौद्योगिकी का सफल परीक्षण ।

2014

• दूरसंचार विभाग ने सी-डॉट को कार्बन फुट प्रिंट मॉनिटरिंग के लिए बीटीएस से डाटा संग्रह विकल्पों की जांच करने के लिए एक परियोजना सौंपी, जिसे अखिल भारतीय स्तर पर विस्तारित करने की सम्भावना थी। एक स्थल पर पीओसी का प्रदर्शन किया गया ।

2015

• दिसंबर 2015 में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को सी-डॉट ज्ञानसेतु समाधान का पायलट परीक्षण प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया । • वर्ष 2015-2016 के दौरान, सी-डॉट ने एम 2 एम संचार के लिए दूरसंचार इंजीनियरिंग सेंटर (टीईसी) कार्यकारी समूहों में सक्रिय रूप से भाग लिया और तकनीकी रिपोर्टों में योगदान दिया ।

2016

तीन श्रेणियों में एईजीआईएस ग्राहम बेल पुरस्कार से सम्मानित: • अभिनव दूरसंचार उत्पाद श्रेणी: सी-डॉट लांग रेंज वाईफ़ाई • अभिनव प्रबंधित सेवाएं श्रेणी: जीआईएस-आधारित फाइबर फॉल्ट लोकलाइजेशन सिस्टम • ग्रीन टेलीकॉम श्रेणी: सी-डॉट ग्रीन पावर सप्लाई यूनिट