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संक्षिप्त इतिहास

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स(सी-डॉट) भारत सरकार का दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास केंद्र है। इसकी स्थापना एक स्वायत्त संगठन के रूप में अगस्त 1984 में की गई थी। इसे भारतीय दूरसंचार नेटवर्क की आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए अत्याधुनिक दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए पूर्ण स्वायत्तता और स्वतंत्रता दी गयी थी। मुख्य उद्देश्य दूरसंचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट केंद्र का निर्माण करना था।

अपने प्रारम्भिक वर्षों में सी-डॉट ने ग्रामीण भारत में दूर संचार क्रांति का सूत्रपात किया, जिससे इस क्षेत्र के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ। अन्तर्राष्ट्रीय संचार व्यवस्था से जुड़ने मिलने के कारण ग्रामीण भारत को की पूरी दुनिया मिल गयी। सी-डॉट ने अपनी विकास प्रक्रिया के दौरान उपकरण विनिर्माताओं और इस उद्योग के उपकरण विक्रेताओं का व्यापक आधार तैयार किया। इसके दिल्ली और बंगलूरू परिसरों में स्थित अत्याधुनिक अनुसंधान और विकास सुविधाएं विश्व स्तरीय बेहतरीन सुविधाओं का मुकाबला करती हैं।

बहुत ही कम समय के भीतर लघु ग्रामीण स्वचालित एक्सचेंज - रैक्स और कस्बों के लिए मध्यम आकार के स्विचिज - एसबीएम के रूप में भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित दूरसंचार स्विचिंग उत्पादों ने ग्रामीण भारत में दूरसंचार क्रांति का सूत्रपात किया। इसके बाद मेन ऑटोमेटिक एक्सचेंज - मैक्स के नाम से उच्च क्षमता के डिजिटल स्विचिज पेश किए गए। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के सशक्त तौर-तरीकों के साथ सी-डॉट की प्रौद्योगिकी लाइसेंसशुदा विनिर्माताओं के जरिए देश के कोने-कोने में फैल गई।

डिजिटल स्विचिंग सिस्टम के साथ अपना सफर शुरू करते हुए सी-डॉट ने जटिल दूरसंचार परिदृश्य में सराहनीय परिवर्तन कर दिखाया। इसने वर्षों पुरानी सर्किट स्विचिंग टेक्नालॉजी के स्थान पर ऑप्टिकल सेटेलाइट और वायरलैस संचार के क्षेत्र में उत्पाद विकसित कर एटीएम और भावी पीढ़ी के नेटवर्क के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता सिद्ध कर दी। केवल हार्डवेयर विकास के केंद्र, सी-डॉट ने आईएन, एनएमएस, डाटा क्लियरिंग हाउस आदि जैसे टेलिकॉम सॉफ्ट्वेयर सोल्युशन विकसित कर अपने गतिविधि केन्द्र को नई दिशा दी। इसके अलावा सी-डॉट ने प्रतिबंधित और बंद बाज़ार के माहौल से खुले और प्रतिर्स्पद्धात्मक बाजार तक का सफर भी आसानी से तय किया।

रैक्स/मैक्स डिजिटल स्विच विकसित करते हुए, सी-डॉट ने भारतीय दूरसंचार फैक्टरियों में स्विचों के विनिर्माण की प्रक्रिया और पद्धति विकसित कर ली तथा भारतीय विनिर्माताओं और विक्रेताओं का मज़बूत आधार तैयार करने में मदद की। डिजिटल स्विचिंग प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण की व्यापक पद्धति विकसित की गयी ताकि अनुसन्धान एवं विकास उत्पादों का हस्तांतरण सुगमता से किया जा सके। सी-डॉट के प्रतिभाशाली इंजीनियरों को इसकी अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में अग्रणी प्रौद्योगिकियों पर काम करने से हासिल विशेषज्ञता के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों सहित बहुत सी दूरसंचार कंपनियों में इनकी मांग है। विगत वर्षों में सी-डॉट दूरसंचार को उत्कृष्ट केन्द्र के रूप में देखा जा रहा है। भारत सरकार ने सी-डॉट को दूरसंचार सुरक्षा के लिए केन्द्रीय निगरानी प्रणाली जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं का उत्तरदायित्व सौंपा है।

सी-डॉट एकल उत्तरदायित्व वाले संगठन से एक अनुसन्धान और विकास केंद्र के रूप में परिवर्तित हुआ है, जो विभिन्न महत्वपूर्ण, अग्रणी प्रौद्योगिकियों पर काम कर रहा है। और सरकार से मिल रहे सहयोग से, विशेषकर राष्ट्रीय महत्त्व की परियोजनों को देखते हुए सी-डॉट अपनी प्रासंगिकता बनाये रखने के लिए प्रयत्न करता रहेगा।
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