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समाचार
कम्बोडिया और भारत के बीच सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समझौतों पर हस्ताक्षर
भारत सरकार के संचार मंत्रालय के साथ दो समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए, जबकि एक समझौता ज्ञापन और एक गैर-प्रकटीकरण समझौते को भारत के एक प्रमुख शोध संस्थान सेंटर फॉर डेवेलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) के साथ जोड़ा गया। ग्रामीण क्षेत्रों में उन्नत दूरसंचार प्रौद्योगिकी और वायरलेस समाधानों की तैनाती को संबोधित करते हुए, सी-डॉट और टेलीकॉम कंबोडिया के बीच एक अलग समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
19-03-2019
एईजीआईएस ग्राहम बेल अवार्ड्स के 9 वें संस्करण के लिए विजेता
9वें एईजीआईएस ग्राहम बेल पुरस्कार के विजेताओं की घोषणा गोवा एंटरटेनमेंट सोसाइटी, पणजी में गोवा में कर दी गयी है। समारोह का आयोजन गोवा सरकार की मेजबानी में किया गया। एईजीआईएस ग्राहम बेल पुरस्कार टेलीफ़ोनी के जनक सर अलेक्जेंडर ग्राहम बेल को श्रद्धांजलि के रूप में एईजीआईएस स्कूल ऑफ़ बिज़नेस, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी और टेलीकॉम की एक पहल है। ये पुरस्कार नॉलेज पार्टनर के रूप में सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) और टेलीकॉम सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस (TCOE), कन्वर्जेंस इंडिया और केपीएमजी (KPMG) के सौजन्य से दिए जाते हैं।
06-02-2019
ओडिसा में समेकित सी-डॉट सीएपी पूर्व चेतावनी प्लैटफार्म का सफल परीक्षण
ओडिसा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वालों को एक साथ अपनी पूर्व चेतावनी प्रसार प्रणाली परियोजना के अन्तर्गत आपदा अलर्ट एसएमएस भेजने का परीक्षण किया है। ऐसे एसएमएस भेजने के लिये बीएसएनएल, एअरटेल, वोडाफोन और रिलायंस जिओ समेत प्रमुख दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की सेवायें ली गयी थीं। दूरसंचार विभाग और सेंटर फॉर डिवल्प्मन्ट ऑफ टेलिमेट्क्स- सी-डॉट ने एक कॉमन अलर्ट प्रोटोकल(सीएपी) सलूशन विकसित किया है जिसके माध्यम से एक चयनित भौगोलिक क्षेत्र में सभी मोबाइल धारकों के पास और रोमिंग वाले मोबाइल पर एक साथ जनता को आपदा प्रबंधन संदेश-एसएमएस भेजे जा सकते हैं। सीएपी का प्रायोगिक परीक्षण इससे पहले विभिन्न राज्यों में किया गया था । ओडिसा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण –ओएसडीएमए के अनुसार पूर्व चेतावनी प्रसार प्रणाली 6 जिलों में काम कर रही है।
20-12-2018
टेक्नालजी (प्रोद्योगिकी) का व्यापार वर्ष 2026 तक 2 लाख करोड़ रु से अधिक हो जायेगा
सी-डॉट के निदेशक, श्री एम सुंदर कुमार ने बताया कि 5 जी टेक्नालजी का प्रसार विश्वभर में होने वाला है और 5 जी टेक्नालजी का व्यापार वर्ष 2026 तक 2 लाख करोड़ रु से अधिक हो जायेगा। विज्ञान विश्वविद्यालय में 5 जी संचार, अनुप्रयोग और प्रौद्योगिकियों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन – आईसी5जीसीएटी 18 को संबोधित करते हुये श्री सुंदर कुमार ने कहा कि 5 जी टेक्नालजी पर किये जा रहे सघन अनुसंधान के परिणाम मिल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 5 जी भविष्य की टेक्नालजी होगी । इस सम्मेलन में 40 देशों से 100 से अधिक विशेषज्ञों तथा प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
07-12-2018
भारतनेट के लिए केवल 'मेड इन इंडिया' यानी स्वदेशी उपकरण: सरकार
सरकार ने रविवार को कहा कि भारत में दूरसंचार क्रांति के बाद, भारतनेट परियोजना भारतीय ग्रामीण परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत स्वदेशी उपकरणों का सबसे बड़ा उपभोक्ता होगी। श्रीमती अरुणा सुंदरराजन, सचिव, दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने पत्रकारों को बताया कि पूरी तरह से भारत में बने फाइबर और गिगाबिट-कैपेबल पेसिव ऑप्टिकल नेटवर्क (जीपॉन) उपकरण, दोनों सी-डॉट (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलीमैटिक्स) के पास हैं। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि उपकरण पूरी तरह से स्वदेशी है और इसे अनुकूलित किया गया है ताकि यह ग्रामीण वातावरण में काम कर सके, जहां बिजली की समस्या है और धूल भी एक बड़ा मसला है।